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Showing posts from October, 2022

गोबरधन पूजा

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  // दीपावली विशेषांक // आलेख :  //हमर गाँव-देहात मा गोबरधन पूजा //            हमर छत्तीसगढ़ मा किसम-किसम के तिहार मनाये जाथे; जेमा सब ले बड़का तिहार हवै दीपावली, जेला देवारी तिहार घलो कथे। ये तिहार हर सरलग पाँच दिन तक चलथे। धनतेरस, नरक चौदस, सुरहुती, गोवर्धन पूजा, भाईदूज। गँवई-गाँव मा चऊँथा दिन गोवर्धन पूजा दिन के बड़ विशेष महत्व होथै। गोवर्धन के आशय :-            गोवर्धन हर दो शब्द ले मिलके बने हे। गो अउ वर्धन; यानी गो माने पशु धन में वर्धन; पशुधन के बढ़ोतरी। गोवर्धन शब्द के अपभ्रंश आय- गोबरधन। येला राऊत मन के तिहार कहे जाथे। ये दिन बिहनिया होते साठ सब ले पहिली जेखर-जेखर घर मा गाय-गरुवा रहिथे तेन मनखे मन हर अपन-अपन गाय-गरुवा मन ला रगड़-रगड़ के नउहाथें। तुरते बाद गाय मन के पूजा-पाठ गुलाल-चंदन लगाथें। खिचरी खवाये के महत्व :-           घर-घर मा ये दिन खिचरी बनाये जाथे। पांँच रकम के साग- कोचई-कांदा, कुम्हड़ा, भिंडी,आलू अउ दार चाँउर मिला के खिचरी तैयार करे जाथे। बरा-सोहाँरी घलो मिलाय जाथे। भगवान श्री क...

इस बार की दीवाली

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  // दीपावली विशेषांक // ---------------- बालकहानी :                //इस बार की दीवाली//           नरेश कक्षा आठवीं का छात्र था। उसकी दो बहनें थीं- जयंती और नंदनी। वह सबसे छोटा था। माँ-बाप खेती-किसानी करते थे। अल्प वर्षा के कारण इस साल फसल अच्छी नहीं थी। वैसे भी घर की आर्थिक स्थिति पहले से खराब थी। जैसे भी हो, बस गुजर-बसर हो रहा था।         दीपावली का त्यौहार आया। दीपावली की पूरी तैयारी हो गयी थी। नरेश के बाबूजी रघु बच्चों के लिए नये कपड़े नहीं ले पाये थे। नरेश सबसे छोटा था। इसलिए सब के आँखों का तारा था। इस बात का नरेश घर में पूरा - पूरा फायदा उठाता था। दीपावली की तैयारी में ही बहुत से पैसे खर्च हो चुके थे। नये कपड़े के लिए सोचना पड़ रहा था। रघु और उसकी पत्नी गीता मन ही मन सोच रहे थे कि थोड़ा सा घर में धान रखा है; मंडी ले जाते हैं, वो बिक जाये तो बच्चों के लिये कपड़े भी आ जायेंगे। रघु मंडी की तरफ गया और नरेश खेलने के लिए अपने दोस्त विनय के घर चला गया। विनय ने नरेश को अपना नया कपड़ा, फुलझड़ी, और बहुत सार...