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Showing posts from May, 2024

प्री वेडिंग

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  //आलेख// //प्री वेडिंग – एक फिज़ूलखर्च// शादी फिक्स होते ही लोगों का सबसे पहला सवाल– "प्री वेडिंग हो गई?" हो गई तो अच्छी बात है नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई? आजकल तो सभी करवा रहे हैं। इस आधुनिक युग में ये सब आम बात है, अरे भाई! शर्माना कैसा? आप बस तैयारी शुरू करो। आपको एक बहुत अच्छे फोटोग्राफर और प्लेस(स्थान) बताने की जिम्मेदारी हमारी रहेगी। ज्यादा खर्च नहीं आएगा बस वही..... 'साठ से सत्तर हजार मात्र' ही लगेंगे! और भी...अच्छी फोटोग्राफी चाहिए तो रुपए बढ़ा देना।  आजकल ये हर रिश्तेदार का स्वभाव बन गया है। भारतीय संस्कृति में विवाह– हमारी भारतीय संस्कृति में विवाह को ईश्वर का वरदान और आशीर्वाद के रूप में माना जाता है। बड़े बुजुर्गों का मानना है कि जोड़ी ईश्वर की बनाई हुई होती है। इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन आजकल के मानव इन सभी रीति-रिवाजों से धीरे–धीरे मुँह मोड़ने लगे हैं। इसके अलावा पश्चिमी परंपराओं को अपनाते जा रहे हैं। ये कहाँ की नीति है? हिंदू धर्म में लड़का और लड़की का विवाह के पहले मिलना धर्म के विरुद्ध माना जाता है। आधुनिकता के चलते इन सब बातों को दरकिनार किया ज...

चटनी के चटकारा

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  //चटनी के चटकारा// मोर संग म रहिबे ता खाबे नून चटनी.... तोर संग रहूँ ता खाहूँ नून चटनी.... जइसे गीत ल गावत खानी हमर मुँह म पानी आ जथे, काबर कि हमर छत्तीसगढ़ के चटनी के स्वाद हर बड़ गजब के होथे। हमर चटनी बनाय बर कोनो महीना, मउसम अउ बेरा नइ लगै। जब मन लागिस तब बना ले अउ चटकारा मार के खा ले। मोला चटनी के गोठ गोठियात-गोठियात सुरता आवत हे, हमर छत्तीसगढ़ म कतको किसम–किसम के चटनी बनाए जाथे, अउ चटनी बनाना तइहा जमाना के रीति–रिवाज घलो हरै। त आवव संगी –जहुँरियामन, चटनी के चटकारा लेबो। सील लोड़हा के पीसे चटनी असन स्वाद, आजकल के मिक्सी म नइ रहय, पहिली के मनखे मन पताल चटनी ल बड़ आनंद ले के खावय। पताल, हरियर धनिया, लसुन के करी, हरियर मिरचा अउ नून डार के सील–लोड़हा म घसर के चटनी बनावॅंय, अभी घलो कतको घर म अइसनेच पीसे वाला चटनी बनथे। ये पताल के चटनी ल खाए के मजा अलग ही रहिथे। "अंगाकर रोटी, बासी, भात फरा अउ चीला संग खाय म मजा आ जाथे।" "ये चटनी मन पहिली के जमाना ले छत्तीसगढ़िया मनखे के अंतस म राज करत हें। साग नइ रहै त नून अउ मिरचा ल सान के खा लेवँय" बंगाला चटनी, चिरपोटी पताल के चटन...