Posts

Showing posts from September, 2023

फलाहार

Image
                  //फलाहार के महत्व// तीजा के उपास ला माई लोगन मन हर पूरा लगन से रहिथे, बिहनिया ले उठ के नवा–नवा लुगरा,सोलह श्रृंगार कर के भगवान शिव अउ पार्वती माता के पूजा पाठ करथे। अउ अपन पति के लंबा उम्र के कामना करथे।                   उपास के दूसरा दिन फलाहार करे जाथे; ये दिन घलो बड़े बिहनिया ले माई लोगन मन हा नवा लुगरा पहिर के भगवान के पूजा –पाठ करथे। ओकर बाद घर मा बने किसम–किसम के पकवान , भजिया, सिंघाड़ा के लसलसहा कतरा, तीखुर,सोहारी, भाजी अउ खट्टा साग। अतका जिनिस हर घर मा बनथे। घर मा सब ले पाहिली भगवान ला भोग लगाये के बाद माई लोगन मन खाथे ओकर बाद सब घर घूम–घूम के खाये के नियम हे। ता घरों–घर खाये बर जाथे ।     ये नियम बने घलो लागथे काबर की आपसी मेल –जोल के संगे–संग प्रेम व्यवहार भी बने रहिथे।फेर जब ले कोरोना के सीजन चलत रिहिस तब ले यहु नंदागे। कभू – कभू लगथे की तीजा जाना घलो नंदा जही का......। पकवान के महत्व :– ये दिन कतरा अउ खट्टा साग के विशेष महत्व रहिथे। सिंघाड़ा अउ तीखु...

तीजा विशेष

Image
  //तीजा पर्व विशेष//    लेख :                                 // तीजा के करुभात//           तीजा–पोरा हा हमर छत्तीसगढ़ के माई लोगन बर विशेष तिहार हरे। राखी के बाद सब के मन मा एक अलग से खुशी झलकथे की अब तीजा –पोरा आही।अउ खुशी होही काबर नहीं साल भर मा एक बार ये तिहार हर आथे। वइसे तो हर तिहार हा एके घाँव आथे, फेर ये तीजा मा माई लोगन मन अपन–अपन मइके जाथे। मइके के नाम मा ता जम्मों महिला मन एक गोड़ मा खड़े रहिथे। नवा–नेवन्नीन मन हा आठे मनाथे अउ घेरी–बेरी फोन कर के अपन भाई–माई मन ला बुलावत रहिथे। साल मा कतको बार मइके जाही फेर तीजा मा नइ जाही ता घेरी–बेरी पारा –पड़ोस संग गोठिया डरथे। अई ये दारी मँय तीजा नइ गए हंव बहिनी अब्बड़ सुरता आवत हे दाई–बाबू, भाई–भतीजा के । अपन अँचरा मा आसूंँ पोछत बतावत रहिथे। फेर यहू तिहार हर दिनों दिन कम होवत जावत हे एके दिन बर जाथे अउ लुगरा धर के आ जाथे।            ये तिहार हर पोरा ले शुरू हो के गणेश चतुर्थी तक रहिथ...