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Showing posts from December, 2024

माँ का दर्द

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  (बाल कहानी)                         //माँ का दर्द// माँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वाह! मैदान भी हरा–भरा है। चीनू उछलते हुए अपनी माँ से कहने लगा; हम रोज आ कर खेलेंगे न.....! हाँ बेटा चीनू; माँ ने हँसते हुए हामी भरी। खुले मैदान में चीनू जैसे और भी छोटे – छोटे बच्चे खेल रहे थे यह देख चीनू और भी खुश हो गया। चीनू की दोस्ती उन नन्हें –नन्हें बच्चों से हो गई। प्रतिदिन आते और मजे करते। इसी बहाने सबसे मिलना–जुलना भी हो जाता था। नील गगन के नजारे, ठंडी–ठंडी हवाएं, स्वच्छ वातावरण हृदय को छू लेती थी।                वहीं; सामने के बालकनी से नन्हीं प्रीत (बच्ची) भी इन्हें खेलते देखती और आनंद लेती; साथ ही साथ सोचती मैं भी इनके साथ खेलने जाती लेकिन...... दूर से देख कर ही मुस्कुराती।                     आज शाम चीनू खेलते–खेलते थोड़ी दूर मैदान के दूसरे छोर पर चला गया। माँ अपनी सहेलियों से बात करने में व्यस्त क्या हो गई.....जैसे ही चीनू की माँ की नज़...

इंतजार

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  लघुकथा :                // इंतजार //           आज अध्यापक कक्षा में कदम रखते ही बच्चों से बोले – " बच्चों ! आज सभी अपने–अपने पिता जी को एक पत्र लिखेंगे। पत्र में अगले महीने पैरेंट्स मीटिंग रखी गई है। इस बार हम किसी के पैरेंट्स को कॉल या मैसेजेस नहीं करेंगे। आपकी बातें डाक के माध्यम से प्रेषित की जायेगी। ये समझ लो कि पत्र लिखना तुम सबका आज का कक्षाकार्य है। क्यों बच्चों, सभी तैयार हो न ? " सभी बच्चों ने हामी भरी।           बच्चों ने पत्र लिखना प्रारंभ किया। थोड़ी देर बाद बच्चे बारी–बारी से अध्यापक को पत्र दिखाने लगे। अध्यापक बहुत खुश थे। बच्चों के द्वारा लिखे मासूमियत भरे शब्द उन्हें बचपन की ओर आकर्षित कर रहे थे। कक्षा में घूमते हुए वे एक प्रिशा नाम की लड़की के पास पहुँचे। उसका पत्र अभी तक उनके पास नहीं आया था। तभी अध्यापक ने देखा कि प्रिशा पत्र लिख कर बार-बार फाड़ती जा रही है। उन्हें आश्चर्य हुआ। पूछा- " क्या बात है बेटा ? प्रिशा, तुम ऐसा क्यों कर रही हो? बड़ी परेशान लग रही हो। बताओ प्रिशा...

ख्वाहिश ए दिल

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  //ख़्वाहिश–ए–दिल// शर्मा जी! हमें और हमारे बेटे राहुल को आपकी बेटी नेहा पहली नजर में ही पसंद आ गई। इस बारे में आप लोगों का क्या विचार है? हम जल्द ही जानना चाहते हैं। जी....जी... तिवारी जी; ये तो बहुत ही शुभ समाचार है। शादी पक्की हो इससे पहले मैं आप लोगों के समक्ष अपनी कुछ बातें रखना चाहता हूँ। अरे.....! क्या बात है शर्मा जी; आप निश्चिंत रहिए। हम दहेज–वहेज के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं आप अपना दिल ठंडा रखिए; इस मामले में। तिवारी जी हँसते हुए बोले।                दरअसल, बात यह है कि हमारी बेटी नेहा को कत्थक नृत्य बहुत पसंद है। नेहा हर प्रतियोगिता में अपनी सहभागिता प्रदान करती है। नेशनल–इंटरनेशनल तक के कंपीटिशन में फर्स्ट आई है।दूर –दूर देश–विदेशों में इसके नृत्य की प्रशंसा होती रहती है। मेरी ख़्वाहिश–ए–दिल है कि मेरी बेटी शादी के बाद भी अपना सपना पूरा करें और हमारा नाम यूँ ही रौशन करती रहे।                           मि.और मिसेज तिवारी जी एक – दूसरे को देख खुसुर–फुसुर करने लगे। न...