मन्नत के पौधे
बाल कहानी : // मन्नत के पौधे // शिशिर नदी के किनारे बैठा था। आज उसका मन हमेशा की तरह बहुत विचलित था। थोड़ी देर बाद उसे एक संत नदी की ओर आते हुए दिखाई दिया। वे शिशिर के पास आ कर बैठे। शिशिर संत को बड़ी अचरज भरी निगाहों से देखने लगा। संत समझ गए कि यह बालक कुछ परेशान है। संत ने शिशिर से पूछा- "बालक ! तुम कुछ चिंतित दिखाई दे रहे हो ? शिशिर नतमस्तक होकर बोला- "हे संत शिरोमणि ! हाँ, सचमुच मैं बहुत चिंतित हूँ। मुझे अपने कुछ प्रश्नों के उत्तर नहीं मिल रहे हैं।" संत शिशिर के सर पर हाथ रखते हुए बोले- "वत्स ! इस संसार में ऐसा कोई प्रश्न नहीं है, जिसका उत्तर न हो। प्रश्नों के साथ ही उत्तर की व्युत्पत्ति होती है। बस, हमें प्रश्न का उत्तर ढूँढने आना चाहिए। आखिर प्रश्न क्या है तुम्हारा ? बताओ।" शिशिर ने संत के समक्ष अपनी बात रख...