दर्द–ए–दिल
छोटी कहानी : // दर्द-ए-दिल // " शीला मुझे तुम्हारी बहुत फिक्र हो रही है,और होगी भी क्यों नहीं; उन्तीस बरस की जो हो गई हो। शादी की उम्र हो गई है तुम्हारी। पता नहीं तुमसे कौन शादी करेगा। " शीला की बड़ी माँ मालती के स्वर में चिंता से ज्यादा ताना था। चारों तरफ से सिर्फ एक ही आवाज कानों में गूँजती कि तुमसे शादी कौन करेगा शीला ....? यह समाज शीला के माता–पिता को प्रश्नों से आहत कर डालते थे। जिंदगी भर बिठा के रखने के तानों ने उनका जीना हराम कर दिया था। डूबते को तिनके का सहारा भी नहीं मिलता। अब करें तो करें क्या ? शीला को अपनी ही जिंदगी पहाड़ लगने लगी थी। बार–बार वह अपने आप को कोसती कि आखिर क्यों उसके साथ ही इस तरह का व्यवहार किया जाता है। एक दिन शीला ने भी ठान लिया कि उसे समाज को क्या और कैसे जवाब देना है। शीला को देखते ही लोग तरह–तरह की बातें करते, लेकिन शीला को लोगों की बातें ही अंदर से मजबूत बनाती थी। ...