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Showing posts from August, 2023

लघुकथा

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                             // निःशब्द //           "बिटिया रानी....!  मैं सोच रहा हूँ कि तुम पढ़ाई करती रहो और साहित्य सेवा भी; जिससे हमारी साहित्यसेवा बढ़ती रहे। साहित्य सृजन के जरिये हमारी समाज सेवा भी होगी। मुझे तो अभी और आगे बहुत कुछ करना है। तुम क्या सोचती हो इस बारे में ? क्या तुम सहमत हो मेरे इस बात से ?" एक साहित्यकार पिता इंद्रजीत ने रूही के पास अपनी स्नेहपूर्वक बात रखी।            थोड़ी देर सोचने के बाद रूही बोली- हाँ... हाँ...! पापा क्यों नहीं... ? मुझे आपके साथ अधिक से अधिक समय बिताने को भी मिलेगा; और एक साथ कार्य करने में अच्छा भी लगेगा। रोज अखबारों के पन्नों में बड़े-बड़े अक्षरों में आपके नाम के साथ मेरा भी नाम आएगा।"रूही की बातें सुन इंद्रजीत जी हँस पड़े।            रूही मुँह बनाते हुए बोली- "पापा ! इसमें हँसने वाली क्या बात है ? हम ऐसा कार्य करेंगे तो हम दोनों का एक साथ नाम नहीं आएगा क्या ?"     ...

बाल कहानी

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  बाल कहानी :           //संगति का असर//           बहुत पुरानी बात है। बोरसी नामक एक घना जंगल था। वन की दक्षिण दिशा में किरवई नदी बहती थी। नदी की काली-कच्छार भूमि से लगी एक बहुत बड़ी खुली जगह थी। उस जगह का नाम टीला था। वहाँ कई तरह के पक्षी रहते थे। इनमें एक कौए का परिवार था। उसके बच्चों के साथ एक कोयल का भी बच्चा था। उसका नाम था पीहू। उसे सब पीहूरानी कहकर बुलाते थे।           उस पीहू कोयल को पता ही नहीं था कि उसके माता-पिता कौन है। आखिर उसका बचपन कौए के बच्चों के साथ बिता था। पर अब वह वयस्क हो चुकी थी। उसके माता-पिता कौए के घोंसले में अंडा देकर चले गये थे। कौए के बच्चों के साथ पीहू की परवरिश हुई थी। उसका खानपान, व्यवहार व रहन-सहन कौए जैसा था। यहाँ तक उसकी आवाज कर्कश हो गयी थी। अब तक वह अपनी जाति के पक्षी को देखा नहीं था।उसे तो अपनी ही आवाज अच्छी नहीं लगती थी।         अक्सर वह कौए के बच्चों से बतियाया करती थी कि उसे उसकी आवाज बिल्कुल भी पसंद नहीं है। बेसुरा लगता है। किसी से बात करने का तो ...