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Showing posts from November, 2023

कहानी

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  कहानी :          // देवारी के सरप्राइज//           "चल घर ओ रघु के दाई। अबड़ बेरा होगे। कल अउ आ जाबोन। भूख घलो लगत हे। अहादे बेरा घलो ठढ़ियागे हे। मुँड़ ह तीपत हे।" करगा छाँटत राम्हीन ल मयाराम ह मेड़ म ठाढ़े-ठाढ़े हूँद कराइस।            करगा ल पुदगत-पुदगत राम्हीन कहिथे- "ले न थोरिक रूक न , ताहन जाबोन।" मुठा के करगा ल मेंड़ म फेंके बर माँगत मयाराम फेर तिखारिस-"घर बुता तो घलो परे हे ओ बही। तिहार लक्ठा गेये हे"।            "ले अब काहत हस ते, काली अउ आ जाबोन। देवारी के घर-बुता अड़बड़ बुता ताय। करगा ल डेटरासुद्धा मुरकेटिस, अउ मेंड़ म बम्भुर रुख अरझा दिस।"                   "मेंड़ बड़ ऊपर हे ओ। दे तोर हाथ ला।" काहत राम्हीन के हाथ ल झींकत खानी मयाराम ल हाँसी आगे। "ले धर, अउ ज्यादा हाँस झन । तोला बड़ हाँसी आत हे।" राम्हीन थोरिक जोरहा आवाज म किहिस।     "ले वो बही एक कनी म रिसा जाथस तहुँ हा।" मायाराम राम्हीन संग भुरिय...

आलेख

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                 //दीपावली विशेष// आलेख :       // हमर पुरखौती जिनीस आय देवारी के कुम्हड़ा-कोचई के साग ह //               हमर छत्तीसगढ़ म अब्बड़ तिहार मनाये जाथे; अउ मनाना घलो चाही, काबर की तिहार मनाये ले लोगन म मया-दुलार अउ मीत-मितानी बाढ़थे। रोज दिन तो मनखे मन अपन काम-बूता म भुलाये रहिथे। कोनों ल कोनों ले बात करे तक के समय नइ राहय। जेन दिन तिहार आथे, ओ दिन जम्मो परिवार सँघरा सकलाथे अउ मीठ-मीठ बोली बोलत रहिथे। ईमान से, बड़ निक लागथे।           हमर पुरखा के बनाये नियम हर खाली नइ जावय। कुछ न कुछ सन्देश जरूर मिलथे। देवारी तिहार म कांदा-कोचई के साग-पान राँधे के नियम हे। पुरखा मन का सोच के कांदा-कोचई ल राँधत रिहिस होही। अउ दूसर साग घलो तो बना सकत रिहिसे न ? ये गोठ ल खाल्हे कोती गोठियाये हँव। कुम्हड़ा-कोचई का हरय -  ------------------------           कुम्हड़ा ह साग के गिनती म आथे। अउ फल भी माने जाथे काबर की येकर से हलुआ जइसे मीठा बियंजन घलोक बनाये...