उपेक्षा
//उपेक्षा// अरे तुम यहाँ! तुम्हें तो कोई पूछता भी नहीं होगा। हा.....हा....ही.....ही....!! जोरों से व्यंग भरी हँसी, तिरछी मुस्कान...जैसे हृदय में कोई तीर चुभा रहा हो। तुम्हें यहाँ जीने का कोई अधिकार नहीं है। अपनी हालत देखी है कभी तुमने? हमें देखो जब कोई युवती अधिक सुंदर दिखती है तो लोग उसे हमारा दर्जा देते हैं कि गुलाब की तरह दिख रही हो, लोग मुझे अपने जीवन में प्रेमपूर्वक स्थान देते हैं; आज की युवा पीढ़ी मेरे बिना अधूरी है। हाँ, और मैं गेंदा; मुझे भी लोग खूबसूरती का पर्याय समझते हैं। हम तो हरि चरणों तक भी समर्पित हो जाते हैं और तुम्हें तो ईश्वर तक अपने आसपास भटकने नहीं देते। छी..... छी....... कितनी बदबू है तुम्हारे अंदर.....! गुलाब और गेंदा अपनी नाक पंखुड़ियों से ढँकने लगे। भगवान ने प्रकृति में कोई भी चीज अनावश्यक नहीं बनाई है, हर चीज की कीमत वक्त आने पर ही पता लगती है। मेरी भी अस्मिता है, मेरे दामन में दाग लगाने का आपको कोई अधिकार नहीं है। बेशरम का पौधा पत्तियां...