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हमर राजिम मेला

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  आलेख ------             // जाति, धर्म अउ सम्प्रदाय के संगम मा हमर राजिम मेला//           माँघ अउ फागुन के महीना हर लोगन मन बर बहुत ही खास रहिथे; अउ रही काबर नहीं ; माँघी पुन्नी के मेला जे लगथे। अतेक बड़ कुम्भ के मेला राजीवलोचन धाम मा भराथे। जेन मनखे मन राजिम जइसे पवित्र स्थान मा रहिथे, तेखर भाग तो खुलबे करही। संगवारी हो, हमर राजिम के मेला-मैदान हर पन्द्रह दिन पहिली भराये के शुरू हो जाथे। ये मेला हर महाशिवरात्रि तक रहिथे।                              " देवत हावँव नेवता, आवव जुरमिल लोग।    दर्शन कर भगवान के, खाहु पीड़िया भोग।। "                     गदबद-गदबद मेला मैदान हर करत रहिथे। माँघ पुन्नी के दिन बड़े बिहनिया ले लोगन मन महानदी, पैरी अउ सोंढूर नदी के संगम मा स्नान कर के राजीवलोचन अउ कुलेश्वर महादेव मा जल चढ़ाथें; पूजा पाठ करथें। उही दिन ले मेला के शुरुआत घलो होथे। बड़े-बड़े झूला, सरकस, किसम-किसम ...