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Showing posts from November, 2022

प्रभा के बाल दिवस

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  //बालदिवस विशेष// बालकहानी :             // प्रभा के बालदिवस //           प्रभा अउ शालू  दूनोंझन सहेली रिहिसे। सँघरा खेलय-कूदय। पर दूनोंझन स्कूल नइ जावत रहैं। सबले बड़का समस्या की वो मन देवार जाति मा पैदा होय रिहिसे। तेखर कारण पढ़ई-लिखई ले बनेच दुरिहा रहैं। प्रभा ला पढ़े-लिखे के अब्बड़ सउँख रहै। दूसर लइका मन ला स्कूल जावत देखय बेग, कॉपी-किताब,रंगीन ड्रेस त "अगास म उड़े अस लागय"। काश ! महूँ स्कूल जातेंव। ओखर जाति मा शिक्षा ला जादा महत्व नइ देवत रिहिसे। प्रभा ह अपन माँ ल अब्बड़ जिद्द करे - "माँ महूँ स्कूल जाहूँ न वो... । दूसर ल देखथों त मोरो मन करथे। प्रभा के माँ प्रभा ला चुप करा दे - "काय करबे स्कूल जा के ?" हमर जाति मा पढ़ई-लिखई नइ करे; अउ टूरी मन तो अउ कुछू नइ कर सकँय। चुपचाप बोरी धर अउ जा कबाड़ी; कचरा ला बिन के लाबे, बेचबो तभे तो खाबो का ? कोन सा अफसर बनबे पढ़-लिख के ?"  प्रभा चुपकन भीतरी मा चल दिस। प्रभा - शालू ला अब्बड़ बोलय कि शालू चल न हमन घलो स्कूल जाबो। बढ़िया खेल-कूद अउ गाना सिखबो। शालू मना कर दे- "मोला सुउंँख नइ हे ...

तुलसी विवाह

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  //तुलसी विवाह पर्व विशेष// आलेख :     // नारी की महत्ता व अस्तित्व को अवगत कराता पर्व : एकादशी देवउठनी//           हमारे छत्तीसगढ़ में तीज-त्यौहारों का बहुत महत्व है। यहाँ अनेक प्रकार के तीज-त्यौहार मनाये जाते हैं। कार्तिक मास में दीपावली के बाद देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाता है, जिसे 'छोटी दीपावली' भी कहते हैं। इस दिन माता तुलसी और श्रीहरि विष्णु जी का विवाह शुभ माना जाता है।                  कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के एकादश को देवउठनी एकादशी मनायी जाती है। पौराणिक कथानुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष से कार्तिक शुक्ल पक्ष चार माह तक भगवान श्रीहरि विष्णु जी क्षीरसागर में शयन करते हैं।  भगवान विष्णु के शयनकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के दिन चार माह की निद्रा से जागृत होने के बाद देवउठनी एकादशी मनायी जाती है। भगवान विष्णु जी के साथ-साथ सभी देवताओं की भी पूजा की जाती है। इसी दिन से शुभ एवं मांगलिक कार्यों का प्रारंभ होता है। कहा जाता है कि वृंदा राक्षस कुल में जन्मी...