संस्कार
संस्कार
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गाँव की औरतें हमेशा हैंड पम्प के पास जा कर पानी भरती थी। और वही मौका मिलता था सभी औरतों को इकट्ठा हो कर बातें करने का ।सभी अपना - अपना सुख दुख सुनाते थे।बाकी समय सब घर मे ही रहते थे।वही गाँव में दो औरतें रहती थी। एक का नाम मीना था और दूसरे का नाम राखी था।मीना थोड़ी घमंडी स्वभाव की थीऔर राखी बहुत सरल स्वभाव की थी। दोनों के एक एक लड़के थे ।मीना अपने बेटे को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाती थी।और राखी सरकारी स्कूल में पढ़ाती थी।
एक दिन दोनो के बच्चें स्कूल जाते समय हैंडपंप के पास गए जहाँ उन लोगो की माँ पानी भर रही थी।मीना का बेटा बहुत रोने लगा और कहने लगा कि मम्मी मुझे स्कूल नही जाना है , उसी वक्त जमादार जो कि गाँव की गंदगी साफ करने आये थे उसे देख कर मीना कहने लगी कि देखो बेटा अगर तुम स्कूल नही जाओगे तो ऐसे ही जमादार बन जाओगे और गंदगी साफ करोगे, ये सुनकर मीना और उसका बेटा बहुत जोर जोर से हँसने लगे और कहने लगा कि छी छी मुझे ऐसा गन्दा काम नही करना मै रोज स्कूल जाऊंगा। फिर मीना राखी को सुनाते हुये कहने लगी की जो सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं वो गधे होते हैं और ऐसे ही छोटे सोच वाले होते हैं। वही खड़ा राखी का बेटा को बहुत बुरा लगा कि मीना काकी मेरी माँ को ऐसा सुना रही है फिर राखी का बेटा सोच कर कहने लगा कि माँ मैं भी रोज स्कूल जाऊंगा और पढ़ लिख कर जब बड़ा आदमी बनूँगा तो ऐसे ही जमादार जैसे कई गरीबों की मदद करूँगा।ये बाते सुनकर माँ की आँखों मे आँसू आ गया।और सभी औरतें कहने लगी कि बेटा चाहे अंग्रेजी स्कूल में पढ़े या सरकारी स्कूल में संस्कार तो अच्छी सोच और परिवार से मिलता हैं।कोई अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने से ही संस्कारी नही होता है , संस्कार तो सरकारी स्कूल और माँ और पिता के अच्छे विचारों से मिलता है ।ये सब बातें सुनकर मीना अपना सर नीचा करके वहाँ से चली गयी।
प्रिया देवांगन "प्रियू"
पंडरिया
PRIYADEWANGANPRIYU

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