प्रेम

 



प्रेम

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आनंद को बचपन से ही पशु - पक्षियों से बहुत प्रेम था। वह अपने घर मे हमेशा गाय पालने को कहता था। वह अपने पिता जी को कहता था कि एक गाय ले आओ , लेकिन उनके घर मे जगह नही होने के कारण उसके पिता जी नही लाते थे। एक दिन आनंद जब स्कूल जा रहा था तो देखा कि रास्ते मे एक गाय के बछड़ा का एक्सीडेंट हो गया था , उसके पैरों से बहुत खून निकल रहा था , तभी आनंद उस बछड़े के पास गया और उस बछड़े को  घर ले आया। आनंद घर आ कर अपने मम्मी- पापा को आवाज लगाया मम्मी जल्दी आओ । उसकी मम्मी दौड़कर बाहर आई कि अभी तो आनंद स्कूल गया और अचानक उसकी आवाज कहा से आ रही है। मम्मी - पापा दोनो बाहर आये और देखे की आनंद एक बछड़े को जो कि उसके पैर में चोट लगा है उसको घर ले आया है।फिर सारी बात अपने मम्मी - पापा को बताया। उसके पापा बछड़े की मरहम पट्टी किये ।कुछ देर बाद बछड़े के मालिक ने ढूँढते हुये आनंद के घर आ गया।और बछड़ा को माँगने लगा।तब आनंद ने उसे रखने की जिद्द की।बछड़े के प्रति उसके प्रेम को देखते हुये मालिक ने बछड़ा आनंद को दे दिया।अब आनंद बहुत खुश था और अच्छी तरह देख भाल करने लगा।कुछ दिन बाद बछड़ा ठीक हो गया। आनंद बछड़े का नाम गौरी रखा। गौरी भी आनंद से बहुत प्रेम करती थी । दोनो एक - दूसरे के साथ खेलते थे। और इसी तरह दोनो में अटूट प्रेम का रिश्ता बन गया था। अब गौरी बड़ी हो गयी थी । तो बाहर कुछ घास फूस खाने चली जाती थी। एक दिन आनंद गॉर्डन में बैठे बैठे गौरी को देख रहा था और उस पल को याद कर रहा था जब गौरी मिली थी तो कितनी छोटी थी अब कितनी जल्दी बड़ी हो गयी है , तभी अचानक आनंद के पास कुछ बदमाश लड़के आ गए और आनंद को परेशान करने लगे , आनंद को जबरदस्ती मारने लगे।आनंद बहुत चिल्ला रहा था बचाव - बचाव मेरी मदद करो मुझे गुंडे मार रहे हैं । लेकिन कोई आनंद की मदद करने नही आया ।सभी गुंडो के डर से वहाँ से भाग गए। आनंद चिल्लाता रहा । तभी अचानक गौरी को आनंद की आवाज सुनाई दी।गौरी दौड़ते आई और देखी तो आनंद को गुंडे मार रहे थे।उसी समय गौरी को याद आया कि जब उसका एक्सीडेंट हुआ था तो आनंद ही मेरी जान बचाया था। कोई इंसान मेरी मदद नही की थी।और आनंद के वजह से ही मैं यहाँ हूँ । गौरी आई और सभी गुंडो को अपने सिंग से मार मार कर घायल कर दी। गुंडो को उठा उठा के पटक दी। गुंडे वहाँ से भाग गए। फिर गौरी और आनंद दोनो घर आये तो मम्मी - पापा देख के दंग रह गए ये क्या हो गया आनंद तुम्हे।तभी आनंद सारी बातें बताया ।और कहने लगा कि मम्मी इंसान तो सभी भाग गए कोई मेरी मदद नही किये मैं चिल्लाता रहा।और आज मेरी जान गौरी बचाई है। फिर सभी लोग गौरी को गले लगा कर रोने लगे।और इसी तरह गौरी से सबका प्रेम और बढ़ गया।


प्रिया देवांगन "प्रियू"

पंडरिया 

छत्तीसगढ़

Priya Dewangan Priyu


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