"खानपान"

 



खानपान :


  // हमर आमा के अथान : बड़ सुग्घर खानपान  //

               जइसे ही गरमी के मौसम आथे , वइसे ही आमा के सीजन घलो आथे। आमा के नाम सुनते ही मुँह मा पानी आ जाथे। वइसे तो आमा के अब्बड़ अकन जिनिस बनथे। आज मंँय हर आमा के अथान बनाये ला बतावत हँव।
आवश्यक समान :-
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               चेर बंँधाये आमा, सरसों, लहसुन, तेल, नून, मिरचा, हींग, पीसी हरदी, सौंफ।
विधि :-
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               सबले पहिली आमा ला रात भर पानी मा बोर देथे। ओकर बाद बिहनिया बेरा पानी ले निकाल के सरोता मा लम्बा - लम्बा दू या चार टुकड़ा मा काटे जाथे। ओला आमा चानी कहे जाथे। आमा के चानी ला थोरिक घाम मा सुखो देथे। ओकर बाद सरसों , तेल , लहसुन, मिरचा , सौंफ ला गरम कढ़ाई मा भून के येखर मसाला तैयार करे जाथे। फेर ये मसाला ल सुपा, पर्रा या टुकनी मा मिलाय जाथे। मसाला मा थोरिक हींग मिलाय ले स्वाद अउ खुशबू अच्छा आथे। आमा के अइलाये के बाद सबो मसाला ला आमा डराये हँड़िया, बरनी, अउ नहिंते प्लास्टिक डब्बा मिला देय जाथे, अउ ऊपर से स्वादनुसार नून डारे जाथे। सरसों के तेल ला ऊपर ले डारे जाथे। सबो मसाला मिल जाथे ओला कूर कहे जाथे। आमाचानी ह जतका तेल मा भीगे रहिथे, वतकी मिठाथे।
              ये प्रकार से आमा के अथान बनाये जाथे। येला बासी, भात, रोटी संग मा खाये मा अब्बड़ मजा आथे।
संदेश :-
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              आमा के अथान ह हमर छत्तीसगढ़ी खानपान के एक बड़ा बढ़िया सांस्कृतिक पहचान आय। हमर छत्तीसगढ़ मा आमा अथान डरई ह चलते रहना चाही; ताकि अवइया पीढ़ी ह येकर अनुकरन करते राहे। हमर खानपान के ये पहचान कभू झन मिटै,  हर छत्तीसगढ़िया ल येकर धियान देय ला पड़ही।
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प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़

Priya dewangan "priyu"

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