पतला रोटी

 खानपान :








//सुग्घर गोठ खानपान के : पतलारोटी गहूँपिसान के//  



              वइसे तो गहूँ पिसान के रोटी याने पतला रोटी, जेन ला बेलनारोटी घलो कहिथे; छत्तीसगढ़ मा ही नहीं बल्कि दूसर देस मा घलो लोगन मन जानथे। लेकिन दूसर देस मा सिरिफ होटल मा देखे अउ खाये ला मिलथे , अउ हमर छत्तीसगढ़ मा घरो-घर संझा - बिहनिया बनथे अउ खाये ला मिलथे।


            छत्तीसगढ़ मा मनखे मन हर गहूँ ला बिसाके ओला धोके अंगना-दुवार या छत मा सूखा देथे । ओखर बाद पिसान चक्की मा पिसवा देथे। लेकिन अब अतेक झंझट कोनों नइ करना चाहे, सब झन ह सुविधा देखथे की जल्दी से जल्दी सब काम हो जाये अउ ज्यादा मिहनत घलो करे ला मत पड़े। अउ आजकल लोगन दुकान मा ही गहूँ पिसान बिसा लेथे। ओला उपयोग मा लाये जाथे। आवव संगी आज आप मन ला गहूँपिसान के रोटी बनाये बर बतावत हँव।



आवस्यक जिनीस :-

गहूँपिसान, चलनी, पानी, नून, तेल या घींव, तवा,चिमटा।



विधि :-

               सबले पहिली पिसान ला पतीला मा निकाल के चलनी मा झोल देथे , ताकि कुछू कचरा मत राहे। ओखर बाद सुवाद अनुसार नून डारे जाथे, अउ ओमा धीरे-धीरे पानी मिला के अच्छा फूटत ले पिसान ला सान देथे। बने ढंग ले सनाये पिसान ला नान-नान कुटका करके गोलियाये जाथे, जेन ला "लोई" कहे जाथे।


             अलग से प्लेट या कटोरी मा सुक्खा पिसान रख के लोई मा हल्का-हल्का लगाथे, जेन ला "परथन देवई" कहे जाथे। इही परथन लगे लोई ला चौकी मा रखके बेलना ले ओला धीरे-धीरे बेल के गोल आकार रूप देय जाथे। रोटी ला हमेसा गोल ही बनाये जाथे त खाये मा अउ दिखे मा घलो बड़ सुग्घर लागथे। 


            ओखर बाद आगी-चुल्हा या गैस मा रखे तवा के गरम होये के बाद गोल बनाये रोटी ला डाले जाथे। कमती आँच मा ऊपर-नीचे उलट-पलट के दुनों कोती सेकबे त बने मिठाथे। ओखर बाद चिमटा मा धर के तवा ले उतार के ओला चुल्हा या गैस के कमती आँच मा रख के फूलोय जाथे। रोटी सेकाय के बाद वो फूल जाथे त समझ जाथे की रोटी तइयार होगे।


             कोनों घर मा सुक्खा रोटी बने पसन्द करथे, त कोनो घर के लइका मन थोरिक तेल या घींव लगे वाला रोटी पसन्द करथे। फूलोय के बाद ओला हल्का-हल्का ऊपर से तेल या घींव चुपर देथे। येखर ले रोटी नरम घलो रहिथे। ये बेलनारोटी ला सब्जी, दूध, चाय, गुड़, शक्कर,आमा के अथान,नींबू या पताल के चटनी सँग खाये जाथे।


रोटी खाय के फायदा :-

                    रोटी खाय ले सरीर ला बहुत फायदा होथे। बहुत-अकन बीमारी घलो दुरिहा जाथे। जइसे- डाइबिटीज, गैस, मोटापा, सुगर, ब्लडप्रेशर कम-जादा होना। बीमार मनखे मन ला डॉक्टर हमेसा रोटी खाये के सलाह देथे। रोटी खाये ले पानी जादा पियाथे, जेकर सरीर ल उचित मात्रा मा पानी मिलथे। रोटी खाये ले मोटापा मा कमी होथे अउ सरीर सुवस्थ रहिथे। सुगर वाले मन ला डॉक्टर हा रोटी खाये के विसेस सलाह देथे।


                ये बात के बहुत खुसी होथे कि रोटी ला मनखे मन अउ आजकल के लइका मन ला बहुत पसंद आथे। इस्कूल वाले लइका हो या ऑफिस जवइया मनखे , मँझनिया बेरा अपन भूख मिटाये बर रोटी पसन्द करथे। हमर जिनगी मा रोटी के विसेस महत्व हे। येमा प्रोटीन प्रचुर मात्रा मा पाये जाथे, संगे-संग कारबोहाइड्रेट अउ सोडियम, कैल्सियम, मैग्निसयम जइसे खनिज तत्त्व घलो मिलथे। अब धीरे-धीरे देस-विदेस मा घलो गहूँ के बने रोटी के महत्व बाढ़त जात हे।


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प्रिया देवांगन *प्रियू*

Priya dewangan "priyu"

Comments

  1. बहुत सुग्घर प्रिया जी,हमर धरोहर,हमर सँस्कृति के बने रखवारी करईया,पोठ कर इया, ए लेख के लिए बधाई बधाई।

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    1. धन्यवाद sir जी 🙏🏻

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  2. बहुत बढ़िया, सादर बधाई

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  3. धन्यवाद गुरुदेव 🙏🏻

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