हैप्पी बर्थडे प्रेरणा
बाल कहानी :
//हैप्पी बर्थडे प्रेरणा//
प्रेरणा के लिये आज का दिन बहुत खास था, और होगा भी क्यों नहीं; आखिर आज उसका जन्मदिन जो था। सुबह उठ कर उसने सबसे पहले मम्मी का आशीर्वाद लिया। भैया बड़ी दूर जगह नौकरी करते थे। वे भी आये हुए थे; साथ में मामा जी थे।
प्रेरणा के पापा जी दुनिया में नहीं थे। उनकी बहुत याद आ रही थी उसे। मन बड़ा उदास था। पापा के साथ बिताये लम्हें खुशियों में धुँधलापन ले आते। ऐसा लगने लगता, मानो प्रभात का खिला कँवल रवि के अस्तांचल से धुमिल होने लगा हो। आज तो प्रेरणा के दिलो-दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी-"काश ! आज पापा जी होते।"
मम्मी ने आज सब के लिये मीठा पकवान बनाया। भला वह कैसे भूलती, अपनी प्यारी बिटिया का जन्मदिन। प्रेरणा भी सुबह जल्दी उठी। नहा भी लिया। पूजा-पाठ भी हो गया। सुबह से ही उसका ध्यान बार-बार मोबाइल की तरफ जा रहा था कि अब किसी का कॉल आने वाला है। बड़ी प्रतीक्षा थी कि कौन उसे सबसे पहले जन्मदिन की बधाई देता है।
समय बीतता गया। न ही प्रेरणा की किसी सहेली का कॉल आया; और न ही रिश्तेदारों का। उसके मन में उथल-पुथल होने लगी। कुछ देर बाद भैया को वापस शहर जाना था, तो वे प्रेरणा को जल्दी ही केक काटने को बोले। मम्मी, भैया, मामा जी के साथ प्रेरणा ने केक काटा। थोड़ी खुशी हुई। नाश्ता कर के वे चले गए। फिर कुछ खास मित्रों के कॉल आते गये।
कुछ समय बाद प्रेरणा अपनी मम्मी से बोली- "मम्मी, किसी रिश्तेदार का कॉल नहीं आया।" मम्मी की नजर भी मोबाइल की तरफ ही थी कि आज उसकी बेटी को कोई जन्मदिन की बधाई क्यों नहीं दे रहा है। सुबह से रात हो गयी। किसी रिश्तेदार का कुछ पता नहीं। अब प्रेरणा का गुस्सा उबलता ही जा रहा था। आजकल तो मोबाइल में जिनका भी जन्मदिन रहता है; स्टेटस में फोटो के साथ बधाई प्रेषित हो ही जाता है। लेकिन उसके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। वह घड़ी-घड़ी मोबाइल का स्टेटस देखती थी, कोई न कोई तो बधाई दिये होंगे। पर हर मैसेज बाॅक्स ब्लैंक रहता। उसे बहुत बुरा लगा। मम्मी से शिकायती लहजे में बात करने लगी।
देखते ही देखते रात हो गयी। किसी का कुछ पता नहीं। प्रेरणा के गुस्सा का पारा बढ़ता गया; बोली- "दूसरे का जन्मदिन सब को याद रहता है, आज मेरी बारी आई तो सब भूल गए। क्या यही है हमारा परिवार ? अगर किसी का जन्मदिन रहता है तो आप तो बड़े सबेरे से ही कॉल कर के बधाई दे देते हैं। सब का जन्मदिन आपको याद रहता है। लेकिन मेरा जन्मदिन आज किसी को याद नहीं। हम लोग हर किसी की खुशी और गम दोनों में बराबर साथ देते हैं। कल तक पापा जी साथ थे, तो सब आगे से हमें याद करते थे। कॉल करते थे। आज एक कॉल तक नहीं , क्यों मम्मी क्यों...? " मम्मी पर आज प्रेरणा के सवालों की झड़ी लगती जा रही थी- "अब कोई जरूरत नहीं है आपको भी किसी का जन्मदिन वगैरह याद करने की। कितने स्वार्थी हैं लोग...! मुझे आज पता चल गया।"
मम्मी प्रेरणा के समक्ष निरुत्तर थी। उसे भी बहुत बुरा लग रहा था। लेकिन बेटी के सामने मन मसोस कर रह गयी। मम्मी ने लाडली प्रेरणा को गोद में बिठाया; और बड़े प्यार से समझाने लगी- "देखो बेटा ! जो जैसा करता है, उसे वैसा ही करने दें। अगर हम भी उनके जैसा ही करेंगे तो, उनमें और हम में क्या फर्क रह जायेगा। जिनके पास जो रहता है न, वही तो ही वो दे सकते हैं न।"
मम्मी की बातें सुन प्रेरणा बिफर गयी- "कुछ न होगा इन सबसे। जैसे के साथ तैसा ही होना चाहिए।" नन्ही प्रेरणा की आवाज तेज होने लगी। तभी मम्मी गहरी साँस लेते हुए बोली- "कभी ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि उन सब के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाय। नहीं... नहीं....। हमेशा याद रखना बिटिया, हम अपने व्यवहार व संस्कार का ध्यान रखें। आज तुम्हें बहुत बुरा लग रहा है; यह मुझे पता है, लेकिन कभी यह मत सोचना कि कल तुम भी उनके साथ ऐसा ही करोगी। इससे फिर तुम में और उन लोगों में कोई अंतर नहीं रह जायेगा। तुम्हें हम से जो संस्कार मिला है, उसका सदुपयोग करो। तुम क्यों निर्रथक सोच कर परेशान हो रही हो। मैं हूँ न। जिनकी जैसी मर्जी, उन्हें करने दें। हमें फर्क नहीं पड़ता। हमेशा खुश रहना सीखो। मन से प्रफुल्लित रहो, और बदले की भावना भी मत रखो। भगवान सब देख रहे हैं। तुम्हारे साथ तुम्हारे पापा जी भी हैं; और पापा हैं तो भगवान हैं। तुम्हारी हर मनोकामना पूरी होगी। याद रखना, मनुष्य को अपना संस्कार नहीं भूलना चाहिए।" प्रेरणा मम्मी की बातें कान लगाकर सुन रही थी। धारा प्रवाह बोलती हुई मम्मी का गला भर आया। वहाँ से उठ कर चली गयी। प्रेरणा को आज जीवन की महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिली। भीगी पलकें लिए मम्मी के पास गयी। मम्मी के आँसू पोंछते हुए उनसे लिपट गयी; बोली- "मम्मी, मुझे बोलो न.... हैप्पी बर्थडे टू यू...! हैप्पी बर्थडे प्रेरणा....! हैप्पी बर्थडे माय डियर ! अँई बोलो न....!"
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लेखिका
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़
Priya Dewangan "priyu"

बधाई हो
ReplyDeleteधन्यवाद भैया🙏🏻
Deleteबहुत सुंदर प्रेरक बाल कहानी प्रिया जी
ReplyDeleteधन्यवाद sir जी🙏🏻
Deleteवाकई में आंखों के साथ हृदय के प्रत्येक तार को झंकृत कर देने वाली यह लघु कथा आपके लेखन के भाव पक्ष व कला पक्ष दोनों की सराहना कर रहा है। बहुत सुंदर बधाई हो।
ReplyDeleteधन्यवाद हरीश जी🙏🏻
ReplyDeleteबहुत अच्छी कविता👌👌👌
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