चिन्हारी
चिन्हारी :
// मनखे के जिनगी मा सिक्का //
एक हाना हवै कि बखत परे मा खोटा सिक्का ही काम आथे। खोटा सिक्का चलगे; माने बिगड़त काम बनगे। अइसना सियान मन कहिथें। खोटा सिक्का के चरचा के आगू बढ़े ले अब बात आथे कि सिक्का हरै का चीज।
अब जइसे आम मनखे के जिनगी म धन-सम्पत्ति के अंतरगत कोनो जिनीस के खरीदी-बेचई होथे त एक खास जिनीस के जरूरत परथे, जेन ला मुद्रा कहे जाथे। इही मुद्रा के उपयोग एक माध्यम ले करे जाथे- रुपिया-पइसा। अब रुपिया-पइसा ल फेर दो तरीका ले बउरे (उपयोग) जाथे- एक नोट अउ दूसर सिक्का। पहिली के सियान मन सिक्का ला जादा बउरत राहय। हमर बबा के जमाना मा एक पइसा-दू पइसा.... एक आना-दू आना.... चवन्नी-अठन्नी अउ एक रुपिया। येंखर सिक्का आवय। हमन हर तो छुटपन ले सिरिफ पचीस-पचास पइसा अउ एक रुपिया सिक्का ला ही देखे रेहेन। अब के लइका मन हर एक,रुपिया, दू रुपिया, पाँच, दस अउ बीस रुपिया के सिक्का ला ही जानथें।
सिक्का काय जिनीस ले बनथे :-
सिक्का के जरूरत जतका पहिली रिहिसे, वतके आज तको हे। खऊ-खजानी या फेर छोटे-छोटे जिनीस बर सिक्का के ही जरूरत परथे। सिक्का जरमन (एल्युमिनियम), लेड सीसा, ताम्बा, ले बनथे। जेन एकदम मजबूत रहिथे। पहिली जेन सिक्का एल्युमिनियम के रहय तेला कतको टोरे के कोशिश करे तभो नइ टूटे भले फइल जावे।
एक यहू बात ला जानना जरूरी हे कि पहिली के जमाना मा घरो-घर चौखट रहय। अउ चौखट मन मा एक सिक्का ठेसाय (गड़ाय) रहय। अब के जमाना मा काबर नइ ठेसय ? आजकल हमन ला देखे ला तो नइ मिलय; फेर गाँव के सियान मन ला पुछबे त पता चलथे कि पहिली के घर हा छानही , खपरा के बने रहय। जम्मो कपाट (दरवाजा) मन लकड़ी के बनावय त कुरिया (कमरा) के भीतर मा जाये ले पहिली एक चौखट बनावय अउ ओला पार कर के मनखे मन भीतरी मा जावय। चौखट ला डेहरी घलो कहे जाथे। हाना हे कि मोर डेहरी ला पार कर के देखा। अब तो आधा फैशन के मारे डेहरी देखे ला नइ मिलय।
सिक्का काबर ठेसय :-
कहे जाथे कि जेकर पास धन -सम्पदा, माता लक्ष्मी के बरकत जादा रहय त ओखर घर के चौखट मा सिक्का गड़े रहय।कोनो सियान हर "कनवी आँखी मा काजर नइ आँजत रहै" मानो जेन गौटिया रहय तेखरे घर मा सिक्का गड़े रहय। अउ बात आथे की ये सिक्का हर चौखट के सुंदरता ला बढ़ावै। सिक्का ला लगावय त चौखट ह चमकत रहय। पहिली तो बिजली हर कभू रहय कभू नइ रहय। बिजली बूता जावय त इही सिक्का हर अँजोर देवय। चमकय त मनखे मन जान डरय की अब ये मेर चौखट हे। त हपटे (गिरे) के डर घलो नइ रहय। सिक्का ला नानकुन खिला जेला मोची खिला कहिथे तेला बीच मा लगा के चिपकावय। हमर बबा मन कहाँ के फेविकोल,अउ गोंद ला पातीस! चौखट तो लकड़ी के रहय त सिक्का के बीच मा खिला ल ठेसय। अउ भले चौखट टूट-फुट जावय फेर वो सिक्का हर नइ निकलय। अइसन मजबूत घर के डेहरी, लकड़ी अउ कपाट बने रहय।
कोनो-कोनो बताथे की अइसने सिक्का जेला घर मा रखे जाथे तेला चौखट म नइ लगावय। अइसे सिक्का जइसे कोनो आदमी सरग सिधार देहे अउ मृत देह ला मुक्तिधाम लेगे के बेरा जे पइसा, सिक्का फेंके जाथे उही सिक्का ला बिन (उठा) के घर के चौखट मा लगाये । जेकर ले घर मा बुरी आत्मा ले बचाव होय।
अब ये बात कतेक सच हे अउ नहीं तेन ला सियान मन जानही अउ मोर ले बड़े जानकार मन जानही । मोर लइका बुद्धि मा जतेक सुने हँव, अउ जानथँव तेन ला लिखे के प्रयास करे हवँ।
बउरे के वैज्ञानिक कारन :-
चौखट मा सिक्का लगाये के पाछू मा वैज्ञानिक कारन तको हे। कुछू जिनीस के हमन प्रयोग करत हन त ओखर आध्यात्मिक कारन के संगे-सँग वैज्ञानिक कारन जरूर रहिथे। सिक्का के पाछू आध्यात्मिक कारन हे कि धन-सम्पदा बने रहिथे, बुरी शक्ति ले बचाव होथे। वैज्ञानिक कारन हे कि येमा सुंदरता तो दिखथे ही साथ ही साथ घर मा चौखट बने ले बरसात के मौसम मा पानी भीतर नइ जा सकय चौखट तक ही सीमित रहय। अउ सिक्का के बीच मा जेन खिला लगे रहय वो खिला हर बिजली चमकय, गाज गिरय ओखर ले बचाव करे। ओखर कारन सिक्का अउ खिला लगाये रहय। आजकल सोलर पैनल , विद्युतीकरण जिनिस निकल गेहे। बिजली अउ गाज गिरे ले बचाव करथे।
अब के मनखे मन फैशन म उतरत जात हे ।आजकल के लइका मन चौखट ला नइ जानय,त सिक्का लगावय तेला कहाँ जानही; घर मा चौखट ही नइ बने त सिक्का ला कामा लगाही। बिन चौखट के घर बनाथे। घर मा एक हर कमरा के पहिली चौखट रखना चाही। अइसन सियान मन कहे। चौखट ले सुंदरता घलो बाढ़थे। आजकल रुपिया-पइसा के बड़ महत्व हे । एक-एक रुपिया मिलना मुश्किल होथे। एक रुपिया गवांँ जाथे त अइसे लगथे जानो-मानो परान निकलगे। मनखे मन डेहरी घलो बनाही त सिक्का ला नइ ठेसय। जेकर सिक्का रही तेकर परान तो उही म अटके रही। मोर एक रुपिया के सिक्का ला ठेस परेंव । लइका बर चॉकलेट आ जातिस ते।
पुरखा मन के बात ला जानना तको जरूरी हे । का करत रिहिन का नहीं। हमन वइसने कुछू जिनीस ला उपयोग मा ला सकथन के नहीं। पुरखा के बात ला सुने मा अब्बड़ निक लागथे। प्रयोग करन या झन करन हमन ला सुने मा ही आनंद आथे।
आखिर मा एक बात कहना चाहत हँव कि हम ला हमेशा सिक्का के सम्मान करना चाही। ये देश के मुद्रा आय, जेन हर हमर देश आर्थिक बेवस्था के संचालन मा महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे। यहू बात के ध्यान रखना चाही कि जुन्ना ले जुन्ना सिक्का ल सकेल-संजोके रखना चाही, जेखर ले पीढ़ी अवगत होवत रह ही।
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//लेखिका//
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
Priya Dewangan "priyu"

बहुत सुग्घर
ReplyDeleteधन्यवाद भैया जी🙏🏻
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