फलाहार
//फलाहार के महत्व//
तीजा के उपास ला माई लोगन मन हर पूरा लगन से रहिथे, बिहनिया ले उठ के नवा–नवा लुगरा,सोलह श्रृंगार कर के भगवान शिव अउ पार्वती माता के पूजा पाठ करथे। अउ अपन पति के लंबा उम्र के कामना करथे।
उपास के दूसरा दिन फलाहार करे जाथे; ये दिन घलो बड़े बिहनिया ले
माई लोगन मन हा नवा लुगरा पहिर के भगवान के पूजा –पाठ करथे। ओकर बाद घर मा बने किसम–किसम के पकवान , भजिया, सिंघाड़ा के लसलसहा कतरा, तीखुर,सोहारी, भाजी अउ खट्टा साग। अतका जिनिस हर घर मा बनथे। घर मा सब ले पाहिली भगवान ला भोग लगाये के बाद माई लोगन मन खाथे ओकर बाद सब घर घूम–घूम के खाये के नियम हे। ता घरों–घर खाये बर जाथे।
ये नियम बने घलो लागथे काबर की आपसी मेल –जोल के संगे–संग प्रेम व्यवहार भी बने रहिथे।फेर जब ले कोरोना के सीजन चलत रिहिस तब ले यहु नंदागे।
कभू – कभू लगथे की तीजा जाना घलो नंदा जही का......।
पकवान के महत्व :– ये दिन कतरा अउ खट्टा साग के विशेष महत्व रहिथे।
सिंघाड़ा अउ तीखुर बनाये के आध्यात्मिक अउ वैज्ञानिक कारण दूनों हे।
आध्यात्मिक कारण ये हरे कि, कोनो भी शुभ काम के शुरुवात या अंत मीठा बना के करथे; फलाहार के दिन तीजा के अंतिम दिन रहिथे , उही दिन गणेश उत्सव के शुरुवात घलो होथे। ये तो आध्यात्मिक कारण हरे।
वैज्ञानिक कारण के मानना हे की सिंघाड़ा अउ तीखूर दोनों ठंडा जिनिस हरे।पेट ला ठंडा करे के काम करथे। ताकि कोनो प्रकार से एसिड मत बने।
खट्टा साग काबर बनाए जाथे यहु ला सियान मन बता हे की उपास मा खाली पेट रहे से गैस अउ एसिड बनना शुरू हो जाथे, वो एसिड अउ गैस ला खतम करे बर खट्टा साग खाये जाथे।ताकि पेट मा हलचल बने रहे।
ये प्रकार ले सियान मन हर अलग–अलग तिहार के अलग–अलग महत्व बताये हे।
संगवारी हो ये तिहार के नींव ला बनाये रखू अउ आने वाला पीढ़ी ला बताये के सरलग प्रयास करहू तभे हमर पुरखा के मान बने रही।
//लेखिका//
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़

बहुत खूब , बेटू!
ReplyDeleteसुग्घर संदेश प्रिया 🌹🌹🌹
ReplyDeleteबहुत सुघ्घर
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