पेउस





               //अमृत बरोबर दूध– पेउस//

पेउस के नाम सुनते ही जम्मो लइका–सियान के मुँह ले लार टपके ल लगथे। टपकही कइसे नहीं; अतेक स्वाद भरे जेन रहीथे अउ बड़ मुश्किल म मिलथे।
            पेउस दूध जेकर नाँव ह संस्कृत भाषा के पेयूष या पयस् शब्द ले बने हे। हमर छत्तीसगढ़ म येला अलग–अलग जगा म अलग–अलग नाॅंव ले जाने जाथे। 
जइसे– पेउस, पियूष, खीस, अमृत।

पेउस दूध का हरै– गाय या भइॅंस ह बछड़ा जनमथे तेकर बाद एक हफ्ता तक जेन दूध निकलथे; ओला पेउस दूध बोले जाथे। ये दूध ह गाढ़ा पिंवरा रंग के होथे। ये दूध ह अब्बड़ फायदेमंद अउ गुणकारी रहिथे। येमा कई प्रकार के विटामिन, प्रोटीन, वसा अउ कार्बोहाइड्रेट ज्यादा मात्रा म पाए जाथे।

पेउस दूध के फायदा– जइसे माँ के दूध लइका बर पोषण ले भरपूर अमृत समान होथे; वइसे ही गाय–भइॅंस के दूध बछरु-पॅंड़वा मन बर पौष्टिक अउ संपूर्ण आहार होथे अउ सिरिफ बछरु-पॅंड़वा मन बर ही नहीं; मनखे मन के तको बहुत से बीमारी दूर करथे। ये शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता ल बढ़ाथे अउ स्वास्थ्य सुघर रखथे। पेउस दूध के वैज्ञानिक अउ धार्मिक कारण घलो बताए जाथे।

वैज्ञानिक कारण– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाथे; ये ह देह भितरी के वायरस ल मारे के काम करथे।
पाचन म सहायक– एमा लैक्टोज के मात्रा पाए जाथे जेन पाचन म सहायता करथे।

वजन कम – ये ह चयापचय के क्रिया अर्थात् भोजन ल पचा के ऊर्जा निर्माण ले वजन कम करथे।
अइसने एकर अबड़ अकन फायदा बताये जाथे।

धार्मिक कारण – बताए जाथे कि बछरु जनमे के बाद दूध के कुछ मात्रा ल घर के सियान मन सबले पहिली कोठार के देवता अउ साहड़ा देव म चघाथे तेकर बाद  पेउस दूध ल प्रसाद के रूप म खाए जाथे; फेर कोनो–कोनो जगा सुने ल मिलथे कि पहिली के सियान मन ह पेउस दूध ल नइ खावॅंय। कारण ये हरै कि जइसे लइका के जनमे के बाद महतारी के दूध ही लइका ल भरपूर मात्रा म पोषण देथे। वइसे ही गाय–भइॅंस के दूध घलो बछरु-पॅंड़वा मन के विकास अउ उन‌ ला पोठ बनाए म सहायता करथे। 
सब दूध ल मनखे मन पी लिहीं त बछरु मन तो भूखे मर जहीं न! तेन पाय के सियान मन उपयोग नइ करत रिहिन
             
                        तइहा जमाना म गाय–भइॅंस के कमी नइ रिहिस। गाँव म जम्मो घर कोठा–बारी रहय। जेकर घर ज्यादा ले ज्यादा गरुवा, बइला, भँइसा रहय तेन मनखे मन ल गाँव के पोठ गउॅंटिया बोले जाय। हर महीना ककरो न ककरो घर बछरु–पॅंड़वा जनमते रहय। गाँव के मनखे मन पेउस ल प्रसाद के रूप म बाँटय घलो। कोनो–कोनो ल पेउस अब्बड़ सुघ्घर लगथे; खाय खाय के मन लगथे। फेर ज्यादा खाय ले नुकसान घलो होथे। पेट गुड़गुड़ा जथे। कखरो घर गाय जनमे के बेरा आ जाए त लइका मन ताॅंकत बइठे रहय; पेउस दूध मिलही कहिके। "गाय चरावै राऊत, दूध खाए बिलैया।"  पेउस दूध सिर्फ गाय-भइॅंस के ही खाय–पीये जाथे; कुकुर, बिलई अउ छेरी के नइ खाए।
पेउस दूध ल सोझ्झे नइ पी दय। येला जमा के मिठई कस बना के खाए जाथे।

पेउस कइसे जमाय जाथे– पेउस दूध, इलाइची, शक्कर नइते गुड़।

                  सबले पहिली चूल्हा म एक कढ़ाई या गंजी म पानी भर के रखथें, ओकर बाद एक थारी म पेउस दूध, शक्कर नइते गुड़ अउ‌ स्वाद बर इलायची डार के घोरे के बाद थारी ल गंजी ऊपर मढ़ा देथें अउ ढँकना ल तोप देथें। काबर की ओला भाप म चुरोए जाथे। तीस–चालीस मिनट बाद पेउस जम जाथे।
जुड़ाय के बाद चाकू ले कतरा–कतरा काट के खाए जाथे।
मीठापन के कारण बहुत बढ़िया स्वाद रहिथे। पेउस ल बिना चुरोय नइ पीये जाय। अइसे सियान मन बताय हे।
             अब धीरे–धीरे गाय, बछरु, कोठा–बारी सबो ह नॅंदावत हे। 
अब के लइका मन येकर बारे म बहुत ही कम जानथें। गाँव म आज भी जेकर घर गाय-गरुवा हे ओमन तो जानथे ही; फेर शहर के मन ल देखे बर नोहर हो जाथे। अब चीखे बर का देखे बर नइ मिलय; राऊत ल पेउस दूध बर बोलबे त ओकरे घर नइ बाँचय त हमन ल कहाँ दिही।
जब तक गाय-गरुवा के संरक्षण नइ होही तब तक परिस्थिति अइसने विकट रही। धीरे–धीरे दूध मिलना  मुश्किल होवत हे। पहिली फोकट म लोटा–लोटा दूध मिल जात रिहिस; अब फोकट म गोबर घलो नइ मिलय; दूध तो बहुत दूर के बात हरय!
         
                            त संगवारी हो गरुवा–भइॅंसा के संरक्षण, ओकर जतन करना बहुतेच जरूरी हे। शहर म गाय मन बीच रद्दा म बइठे रहिथें, ओकर मालिक मन ओमन ल छुट्टा ढील दे रहिथें, घर म बाॅंध के रखे बर बोझा समझथें। कई बार गाय मन दुर्घटना के शिकार घलो हो जाथें। धीरे–धीरे येकर प्रजाति कमती होवत हे। एला बचा के रखना हे तभे दूध के संगे-संग पेउस दूध ल चीखे बर मिल सकत हे।
           
                           // जय जोहार//


//लेखिका//
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़
PRIYA DEWANGAN "PRIYU" 




Comments

  1. पेउस के बारे में बहुत बढ़िया जानकारी प्रिया बहुत बहुत बधाई !!!

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  2. Bahut hi Sundar jankari aap aise hi vilupt hote hmare cg dhrohar ko apni kavitao ke madhyam se sanjote rahiye ......🖊️🖊️

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  3. सही बात कहेव प्रिया।पेउस खाये बर अब तो नोहर होगे...

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