गुफ्तगू
//गुफ्तगू//
आज कल रिश्ता पक्का करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। लड़के वालों की फरमाइशें सुन कर ही डर लगता है भाई साहब!... विपुल और राहुल मार्निंग वॉक करते आज विवाह के रिश्ते पर चर्चा कर रहे थे।
जी भाई साहब, बिल्कुल! राहुल ने कहा।
अच्छा......! जमाना तो देखिए, आजकल बड़े लोग अपने खेतों में झाँकने तक नहीं जाते और लड़की वालों को खेत–जमीन, जायजाद के बारे में ऐसे सवाल करते हैं जैसे शादी के बाद उनका लड़का खेतों में हल चलाएगा।
वाह..! जोर से ठहाके लगाकर विपुल जी हँसने लगे। अरे.....भाई साहब! इसमें हँसने वाली बात नहीं; राहुल जी वहीं किनारे रुक आँखें बड़ी कर अचरज भाव से बोले- "हमारे घर जो भी रिश्ते आते हैं सब वही पूछते हैं। लड़की इकलौती है तो कुछ तो मिलेगा न हिस्से में, वाह.....भई...... वाह....! ऐसा लगता है मानो लड़की से शादी नहीं; उनकी जमीन और खेती का सौदा करने आया हो।"
सांस लेने तक को पौधे नहीं बच रहे, धनिया क्या लगाएंगे... खेतों की बात करते हैं; मुँह बनाते राहुल जी बोले।
"पहले बुजुर्ग, लड़की में संस्कार ढूँढते थे, अब जमाना बदल चुका है, अब सिर्फ कार ढूँढते हैं वगैरह....... वगैरह....सोने में सुहागा ऐसा कि कई लड़के काम–काज छोड़ जमाई राजा बनकर ऐशो आराम की जिंदगी जीने के सपने देखने लगते हैं।"
अरे...विपुल जी आप अभी तक कुछ नहीं बोले बस भौंरें की तरह सर हिलाए जा रहे हैं....राहुल जी ने हैरानी से पूछा पर वे बोलते भी कैसे..... पौष माह के शीतल समीर चलने के बावजूद राहुल जी की बातें सुनकर विपुल जी पसीने से तर–ब–तर होते हुए नजर आ रहे थे क्योंकि.....विपुल जी भी इसी बिरादरी में शामिल जो थे।
//रचनाकार//
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
छत्तीसगढ़
PRIYA DEWANGAN "PRIYU"

Comments
Post a Comment